आजकल बड़े मजे आ रहे हैं पति, पत्नियों को खूब डरा रहे हैं कहते हैं... अगर तुम सुधरीं नहीं तो कुछ ऐसा हो जाएगा जिस पति के सहारे चलता है तुम्हारा खर्चा-पानी वो चलता-फिरता एटीम कहीं खो जाएगा पत्नी देती हैं जवाब कि तुम यू हीं डरा रहे हो मेरी नजरों से बची ऐसी कौन सी जगह है जहां तुम खोने जा रहे हो? पति से कहती है मुस्काकर मंद-मंद अब नहीं करेगी कोई चुड़ैल तुम्हें पसंद! पति कहते हैं कि भाग्यवान तू समझ नहीं पा रही है दरअसल साधुओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है अगले साल उज्जैन में सिंहस्थ है और साधु बनने के लिए बैचेन हर परेशान गृहस्थ है इसलिए पत्नियों से निवेदन हैं कि पतियों को न सताएं अच्छे-खासे पतियों को साधु बनने से बचाएं यदि पत्नियों ने रखा ध्यान तो होंगे सभी पति उनके आभारी ये काव्यात्मक सूचना है जनहित में जारी!
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