कमाल है, खोजी पत्रकारों की निगाह डीजे बाबू घोटाले पर नहीं गई। डीजे वाले बाबू मेरा गाना चला दो-यह गाना वहां भी सुना जा रहा है, जहां आमतौर पर डाकू और नेता भी जाने से कतराते हैं, यानी अति ही दुर्गम इलाकों में यह गाना पहुंच गया है। इस गाने से साफ होता है कि देश में बाबू-अफसर-नेता गिरोहबंदी किस हद तक पहुंची हुई है। लाचार जनता, बेलगाम बाबू डीजे वाले बाबू से गाना चलाने की रिक्वेस्ट करनी पड़ रही है यानी जनता के पास कोई स्वतंत्रता नहीं रह गई है। अफसरशाही, लालफीताशाही इस कदर हावी है कि अपनी पसंद का गाना सुनने तक के लिए बाबू से निवेदन करना पड़ रहा है। सरकारी बाबुओं से जिन्होंने डील की है, उन्हें पता है कि बाबू ऐसे निवेदन या कोई भी निवेदन आसानी से नहीं सुनते। भ्रष्टाचार की जड़ में ऐसे बाबू हैं, जिनसे हर तरह की रिक्वेस्ट (गाना चलाने की रिक्वेस्ट समेत) करनी पड़ती है। नेता-मिनिस्टर की मनमानी यह गाना साफ तौर पर बता रहा है कि नेता-मिनिस्टर किस तरह की मनमानी कर रहे हैं, इस गीत में ऑफर दिया जा रहा है-अरे क्लब में तेरी सरकार बना दूं, टेबल को तेरी बार बना दूं। वैसे तो हूं बादशाह, मैं आज रात तुझे स्टार बना दूं। ऐसा बेबी काम करा दूं, डांस फ्लोर तेरे नाम करा दूं। जी भर के नाच ले बेबी, शैम्पेन के शावर में। यार तेरा फैन मिनिस्टर, बैठा है जो पावर में। यह गीत चीख-चीख कर बता रहा है कि जिसका चाहने वाला मिनिस्टर हो जाए, वह किसी का भी डांस-फ्लोर किसी के भी नाम करा सकता है। नेता-मिनिस्टर खुले आम अराजकता फैला सकते हैं, यह बात इस गीत से साफ होती है। हर बात के लिए बाबू-मिनिस्टर यह गाना हमारे लोकतंत्र में जन की दुर्दशा बताता है कि कुछ भी आसान नहीं है उसके लिए। जरा-जरा सी बातों के लिए भी उसे बाबू से चिरौरी करनी पड़ रही है और जिसके पास मिनिस्टर की जुगाड़ है, उसे शैंपेन के शावर में नहाने का ऑफर मिल जाता है। बाकी आम जनता को नहाने के लिए पानी नसीब नहीं होता। यह गीत नहीं है, दरअसल हमारे लोकतंत्र में आम आदमी की दुर्दशा की सच्ची तस्वीर है। सच्चा लोकतंत्र तब ही स्थापित होगा, जब गाने चलाने के लिए किसी बाबू की चिरौरी या मिनिस्टर के जुगाड़ की जरूरत ना पड़ेगी।
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