Friday, 20 November 2015

Poetic Fun: जाने क्यों फिर भी हमने, जूतों का ऑर्डर डाला था

नाच नाचकर, कह रहीं थी, यही चमकता हीरा है, होम डिलीवरी हुई तो जाना, ऊंट के मुंह में जीरा है। 'नाप' 'तोल' कर, मंत्र जापकर, खुद को बहुत संभाला था, जाने क्यों फिर भी हमने, जूतों का ऑर्डर डाला था, देने घर आया जब वो, कुछ लगा दाल में काला था, ऑनलाइन शॉपिंग थी या फिर वो इक मकड़ी का जाला था? जूते तो हैं छोटेनिकले, अब बजा रहे मंजीरा हैं, होम डिलीवरी हुई तो जाना, ऊंट के मुंह में जीरा है। महा धमाका सेल लगी थी, चारों और उजाला था, हजार रुपए मैं पांच हार थे, साथ में कंगन-बाला था, करा था हमने ऑर्डर उस पर गरल सखी के गहनों को, सोचा था कि खुश होगी वो, चैन मिलेगा नैनों को, पर फिर निकली वो नकली माला, दिखा रहे थे हीरा है, होम डिलीवरी हुई तो जाना, ऊंट के मुंह में जीरा है। 

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